fbpx
(9 AM - 8 PM)
8686 139 139
Free and confidential mental health support 8686 139 139
counselling@manntalks.org

पैनिक अटैक

आज के वक़्त में ख़तरा या डर, जंगल के उस शेर की तरह हमसे सीधा नहीं टकराता, बल्कि वह अलग-अलग अंदाज़ में हमारे सामने होता है:

इन उदाहरणों से मिलते-जुलते मामलों से, जब हमारा सामना होता है, तो हम अपनी टांगों में कंपकपाहट, पेट में तनाव जैसी चीज़ें महसूस करते हैं। यह आपके शरीर की एक प्रतिक्रिया है जिसे ‘फ़ाइट ऑर फ़्लाइट’ कहते हैं। उस डर या भावना के गुज़रने के बाद, आपको महसूस होने वाला वो तनाव और भाव भी गुज़र जाता है।

हालांकि, कुछ और चीज़ें भी हैं जिनसे हमें बड़े पैमाने पर तनाव महसूस हो सकता है:

यह सभी कारण बार-बार होते हैं, जिससे हम तनाव में आ जाते हैं। तनाव जब बढ़ जाता है और बार-बार होने लगता है, तो हमारे मस्तिष्क और शरीर की, इससे लड़ने की क्षमता थोड़ी कम हो जाती है। ऐसे में हम ‘फ़ाइट ऑर फ़्लाइट रेस्पॉन्स’को महसूस करने लगते हैं, जबकि हमारे आस-पास कोई बड़ा ख़तरा नहीं होता। इस अनुभव को पैनिक अटैक हैं। पैनिक अटैक के दौरान व्यक्ति काफ़ी घबराहट महसूस करता है और असहज होने लगता है। मानसिक दबाव और लक्षणों का ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ जाना इसके पीछे की वजह होता है।

पैनिक अटैक के लक्षण

शारीरिक लक्षण

  • दिल की धड़कने बढ़ना
  • कांपना
  • जी मिचलाना

मानसिक लक्षण

  • काम में ध्यान न लगना
  • मृत्यु के ख़्याल आना या इसे महसूस करना
  • याददाश्त कम होना

भावनात्मक लक्षण

  • रोने का मन करना
  • बैचानी बढ़ना
  • चिड़चिड़ापन होना

वैचारिक लक्षण

  • “मानसिक नियंत्रण खोना/ आपा खोना/ जल्द ग़ुस्सा आना”
  • “मैं बेहोश होने वाला/वाली हूं”
  • “मैं फिर कभी सामान्य महसूस नहीं करूंगी/करूंगा”

ऊपर बताए गए ये लक्षण, पैनिक अटैक से जुड़े हैं. हालांकि, ये सिर्फ़ कुछ एक उदाहरण हैं, जिन्हें कोई व्यक्ति पैनिक अटैक के दौरान महसूस कर सकता है।

पैनिक अटैक के सौ से ज़्यादा लक्षण हो सकते हैं। पैनिक अटैक ज़्यादा से ज़्यादा 20 मिनट तक बना रहता है और 10वें मिनट पर यह अपने चरम पर होता है।

पैनिक अटैक के दौरान उसके प्रभाव को कई तरीक़ों से कम किया जा सकता है।

पैनिक अटैक की स्थिति में ख़ुद को कैसे शांत करें?

गहरी साँसें लेने का अभ्यास

पैनिक अटैक के दौरान व्यक्ति काफ़ी घबराहट महसूस करता है और असहज होने लगता है। इससे हमारे फेफड़ों को ज़रूरत से ज़्यादा काम करना पड़ता है और हम हाइपर्वेंटिलेट का सामना करते हैं। हाइपर्वेन्टलेशन से हमारे ख़ून में CO2 का ज़रूरी स्तर कम हो जाता है। हालांकि, गहरी साँसें लेने पर इसे सुधारा जा सकता है जिससे पैनिक अटैक के लक्षणों को कम किया जा सके।

इस अभ्यास के दौरान नाक से गहरी साँसें लें, इसे पांच मिनट तक रोककर रखें, और कुछ मिनट बाद मुंह से छोड़ें। ऐसा करने के दौरान दौरान आपके होंठ ‘o’ शेप में होने चाहिए। इसे तब तक दोहराते, जब तक की पैनिक अटैक के लक्षण कम न हो जाएं।

54321 एक्सरसाइज़

54321 एक्सरसाइज़ से आपके मस्तिष्क को इस बात को समझने में आसानी होती है कि उसके आस-पास कोई ख़तरा नहीं है। यह एक ऐसा तरीक़ा है जिसमें आप अपनी सभी इंद्रियों का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें आस-पास की चीज़ों को छूकर महसूस करना, नंगे पाँव ज़मीन पर चलना, खुलकर साँस लेना, अपने आस-पास की आवाज़ों पर ध्यान देना, और इर्द-गिर्द की चीज़ों को अच्छे से देखना शामिल है।

  • 5 चीज़ें जिन्हें आप देख सकें
  • 4 चीज़ें जिन्हें आप छू सकें
  • 3 चीज़ें जिन्हें आप सुन सकें
  • 2 चीज़ें जिन्हें आप सूंघ सकें
  • 1 चीज़ जिसका आप स्वाद ले सकें

पैनिक अटैक आने पर किसी की मदद करने का तरीक़ा

किसी को पैनिक अटैक आता देखना अपने-आप में हैरान करने वाला अनुभव होता है। ख़ासकर तब, जब आपको इस बात का अंदाज़ा हो कि कोई परिस्थिति इतनी भी ख़तरनाक नहीं है। ऐसे में जब सामने वाला व्यक्ति घबराहट और ज़रूरत से ज़्यादा डर महसूस करे, तो आप सोच में पड़ जाते हैं और यह समझ नहीं पाते कि सामने वाला शख़्स इतनी घबराहट क्यों महसूस कर रहा है। इन ख़ास बातों का ख़्याल रखकर आप ऐसे हालात में उस व्यक्ति की कुछ मदद कर सकते हैं:

उन्हें याद दिलाते रहें कि यह पल बीत जाएगा

पैनिक अटैक कम से कम 20 मिनट तक बरक़रार रहता है, इस बीच आप उन्हें यह याद दिलाते रहें कि यह एहसास कुछ ही देर तक रहेगा और इसके बाद चीज़ें बेहतर होंगी।

ध्यान भटकाते रहें

आप ध्यान भटकाकर उन्हें शांत होने में उनकी मदद कर सकते हैं। इसके लिए आप उन्हें आस-पास की चीज़ों की गंध महसूस करके, उन चीज़ों को देखने, सुनने, और उनके बारे में आपको बताने के लिए कह सकते हैं।

उन्हें शांत रहने के लिए न कहें

जिस चीज़ को वो महसूस कर रहे हैं उसे रोकना उनके हाथ में नहीं होता। आप भले ही कितनी कोशिश कर लें, वे उस एहसास को खुद से नहीं रोक पाते।

उन्हें तनाव की वजह बताने के लिए दबाव न बनाएं

हो सकता है कि इस डर के पीछे कोई एक वजह न हो। वजह बताने का दबाव बनाने से वे और ज़्यादा असहज महसूस कर सकते हैं, जिससे हालात और ख़राब हो सकते हैं।

गहरी सांसें लेने को कहें

उनके साथ गहरी सांसें लेने की कोशिश करें।

पैनिक को कम करने वाली रिकॉर्डिंग की मदद लें

पैनिक को कम करने वाली रिकॉर्डिंग, एक तरह की गाइड है जिससे किसी शख़्स को ऐसे अटैक के दौरान शांत किया जा सकता है। इस तरह के कई असिस्टेंस ट्रैक, इंटरनेट पर या मोबाइल स्ट्रीमिंग एप्लिकेशन पर मौजूद हैं।